Monday, June 7, 2010

गर्मी की छुट्टियाँ...

गर्मी की छुट्टियाँ ख़त्म हो गयी..... कितना मज़ा आता है ना छुट्टियों में । हर बार तो हम छुट्टियों में जोधपुर जातें हैं (और वहां इतनी मस्ती करते हैं कि पूछो मत...) पर इस बार हम पूरी छुट्टियाँ बॉम्बे ही रहे..बल्लू मासी के पास। पुरु भाईसाहब प्रियं दीदी जोधपुर से आ गए थे....सूरत से मोना मासीसा, स्वराज भैय्या और चार्मी दीदी भी थोड़े दिन के लिए आये थे, आराधना दीदी और योगेश भी आ गए थे....लव भाईसाहब, कुश भाईसाहब और नक्शु भाईसाहब तो थे ही वहां....तो आप ही आप ही सोच लो हमने वहां क्या धमाल मचाई होगी.... खूब मज़ा आया...

इसबार मेरा बर्थडे (20 मई को ) भी बॉम्बे ही मनाया। मम्मा भी मेरे बर्थडे के दिन हैदराबाद से आ गयी थी।
सबने खूब डांस किया...मुझे ढ़ेर सारे गिफ्ट्स भी मिले... खूब..खूब.. और खूब मज़ा आया... मेरे बर्थडे के दिन जो हमने मस्ती कि उसकी एक छोटी सी झलक आपको कुछ फ़ोटोज़ के ज़रिये बताता हूँ... देखो....


पार्टी के लिए तैयार हो जाता हूँ...



लव भाईसाहब मेरे hair-gel लगा रहे हैं...




देखूं तो ...सभी क्या कर रहे हैं?



ओह हो ...गुब्बारे फुलाये जा रहे हैं.....






"DANGER MOUSE" (नहीं पहचाना ? अरे...लव भाईसाहब )



हा..हा..हा....मम्मा !


सभी मस्ती के मूड में...

विभु जीजी डांस कर रही है ..साथ में कुश भाईसाहब, मोना मासीसा , प्रियं दीदी और आराधना दीदी...

आराम से बैठ कर देखता हूँ...




लव भाईसाहब, नक्शु भाईसाहब और कुश भाईसाहब....

मोना मासीसा भी....(सोफे पर बल्लू मासी और मासोसा)



सभी डांस में मस्त हैं तब तक मैं कुछ गुब्बारे फोड़ लूं..(आहा ...कितना मज़ा आ रहा है..)



कुश भईसाहब और लव भाईसाहब..

नक्शु भाईसाहब और पुरु भाईसाहब


मैं भी करूँ .....


देखो..देखो..लव भाईसाहब की चोरी पकड़ी गयी...केक की icing चाट रहे हैं...


ये रहा मेरा Ben10 का केक...



एक केक विभु जीजी के लिए..(हमेशा मैं विभु जीजी के बर्थडे पर केक काटता हूँ ना ...इसलिए ..)



अच्छा लग रहा है ना.....


मुझे नए नए नोट पसंद है ना इसलिए देखो मासोसा ने मुझे इतने सारे नए नोट दिए.....


नए नोट रखने के लिए पर्स भी है... (बल्लू मासी लायी)


लव भाईसाहब मेरे लिए racket लाये और जो घड़ी मैंने पहन रखी है वो vibhu जीजी ne दी

Friday, October 23, 2009

क्या मुझे भी घर छोड़ कर जाना पड़ेगा...?


अभी कुछ ही दिन पहले मम्मा जब मुझे पढ़ा रहे थे तो हमेशा की तरह मन पढ़ाई में कम और दूसरी बातों की ओर ज्यादा था। मन कुछ उदास हो गया । मम्मा से पूछा , 'मम्मा, जब मैं बड़ी हो जाऊँगी तो क्या मुझे भी यह घर छोड़ कर जाना पड़ेगा। ' मम्मा ने पूछा , 'क्यों बेटा ? ' ...' मम्मा, नानीमाँ तो जोधपुर ही है और आप हमें लेकर इस घर में आ गए। और मम्मा, नानीमाँ के मम्मी-पापा कहाँ रहते हैं ? नानीमाँ उनके पास से इतनी दूर जोधपुर कैसे आए? बताओ ना मम्मा........ और बताओ ना क्या मुझे भी इस घर से जाना पड़ेगा? '..... मम्मा ने पूछा , ' तुझे जाना है बेटा?' मम्मा का ये पूछना था और बस....इतनी देर से जिन्हें अपनी आंखों में रोके हुए थी वो आंसू की बूंदे बाहर छलक आई ......मम्मा से बोली ..'नहीं मम्मा, मैं आपको छोड़ कर कहीं भी नहीं जाऊँगी ......आप मुझे बहुत प्यारे लगते हो ....आपके पास ही रहूंगी.... ।' मम्मा ने प्यार से मेरे सर पर हाथ फेरा ... थोड़ी ही देर में मम्मा से फिर कहा....'मम्मा, अगर कभी कहीं गई या कभी कहीं जाना पड़ा ना तो आपको अपने साथ ले कर चलूंगी ....'


मम्मा ने मुझे अपने सीने से लगा रखा था पर फिर भी न जाने क्यों मन बहुत भारी था.....



Sunday, October 18, 2009

थोड़ी लड़ाई.... थोड़ा प्यार ......



आप सभी को दिवाली की शुभकामनाएँ। हमने तो दिवाली पर खूब मज़े किए, खूब पटाखे छोड़े ........ पूजा के बाद जब मम्मा फोटो खीचनें लगे तो थोडी लड़ाई भी की .....लड़ाई इस बात की कि पहले फोटो किसका खिंचा जाए ....अकेले-अकेले का ....या ...साथ -साथ में .... मुझे पहले अकेले की फोटो खिंचानी थी पर जीजी मान ही नहीं रही थी ...जिद कर रही थी कि पहले हमारी साथ में खींचो .....अब यह भला क्या बात हुई ....जीजी की भी तो एक अकेले फोटो खींची थी पूजा के दीयों के साथ .....जीजी कहने लगी अकेले खींचनी है तो भैया की भी ( यानि मेरी ) दीयों के साथ खींचो, दूसरी जगह फोटो लेओगे तो मैं भी साथ खड़ी रहूंगी......अब, मेरी मर्जी होगी वहीँ तो मैं अपनी फोटो खिंचवाऊंगा ना ......तो बस हो गई लड़ाई शुरू .....


जीजी तो खूब रोई भी, बड़ी मुश्किल से मम्मा के बहुत समझाने पर हम माने ......अब जब मान ही गए थे तो बड़े प्यार से हाथ पकड़ कर फोटो खिंचाया .......


जीजी ने अकेले खड़े रह कर फोटो खिंचवाई तो मैं क्यों पीछे रहूँ .......


मैं बैठ कर .....तो जीजी भी बैठ कर ... बस ऐसे ही चलता रहा...







Saturday, October 10, 2009

मेरे retirement plans



कुछ दिनों पहले मम्मा शाम को एक पार्टी में जा रहे थे। चूंकि मुझे सुबह थोड़ा बुखार था इसलिए मेरे जिद करने पर भी मुझे साथ ले जाने के लिए तैयार नहीं हुए। मम्मा से पूछा, 'ये तो बताओ पार्टी किस बात की है?' मम्मा बोले कि उनके ऑफिस में एक अंकल retire हो रहे हैं इसलिए वो retirement की पार्टी दे रहे रहे हैं। आज तक बर्थडे पार्टी सुना था , शादी की पार्टी सुना था (इन में जाती भी हूँ ) पर यह भला retirement पार्टी क्या होती है ....... यह retirement क्या होता है। मम्मा से पूछा तो बोले , ' जब हम ६० साल के हो जाते हैं तो ऑफिस से retirement हो जाता है यानी फिर ऑफिस नहीं जाना पड़ता। ' बड़ा आश्चर्य हुआ ये सुन कर....फिर से पूछा .......क्या ६० साल के होने बाद ऑफिस बिल्कुल नहीं जाना पड़ता ?.....स्कूल भी नहीं और कॉलेज भी नहीं और ऑफिस भी नहीं ? ........ मम्मा ने कहा - ' हाँ बेटा। ' .........इतना सुकून मिला यह सुनकर ......तुरंत मम्मा को कहा , ' मम्मा , जब मैं 60 साल की हो जाउंगी ना तब खू ssssss ब T.V. देखूँगी और खू ssssss ब सोऊँगी ........ । ' मम्मा बोले , 'अच्छा बेटा। '



लगा कि एक और बात अभी से साफ़ कर देना ही बेहतर है....मम्मा से कहा, ' देखो, उस समय मुझे यह मत कहना कि यह काम करदे.... वो काम कर दे .....मैं कोई काम भी नहीं करुँगी....सिर्फ़ T.V. देखूंगी और सोऊँगी ....जितनी देर मेरी इच्छा होगी उतनी देर..... । ' मम्मा हँस दिए (पता नहीं क्यों? ) और बोले, ' अच्छा बाबा, तुझे कोई काम भी नहीं बोलूंगी । ' ...... चैन की एक लम्बी साँस ली ........
यह सब सोच ही रही थी कि अचानक एक ख्याल आया ....... और मम्मा को पूछा , 'मम्मा, आप 60 साल के कब हो होंगे ? '

Sunday, May 24, 2009

कन्याकुमारी से रामेश्वरम...

कन्याकुमारी से उसी दिन शाम को सूर्यास्त देखने के बाद हम रामेश्वरम के लिए रवाना हो गए। अगले दिन (२३/१२ को ) सुबह-सुबह हम रामेश्वरम (चार धाम में से एक और शिवजी के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक ) पहुँचे। नहा के तैयार हो कर हम मन्दिर गए और शिवलिंग के दर्शन किए। वहाँ नानीमाँ ने अभिषेक करवाया। नानीमाँ ने बताया कि यहीं रामेश्वरम में राम भगवान ने लंका पर चढाई करने से पहले शिवजी की पूजा की थी। हम गंध-मंदन पर्वत भी गए जहाँ से हनुमान जी ने लंका जाने के लिए छलाँग लगाई थी। अब तक तो सिर्फ़ T.V./video पर ही रामायण देखी थी और कहानी सुनी थी। आज वो जगह देख रहे थे जहाँ ये सब हुआ था.........हमने तैरता हुआ पत्थर भी देखा......देखा कहीं वो पुल या पुल का हिस्सा नज़र आ जाए जो भगवान राम ने लंका तक बनाया था, वो तो नज़र नहीं आया पर तैरते हुए कुछ पत्थर ज़रूर दिखे एक मन्दिर में।


तैरता हुआ पत्थर....

वहाँ पर हम जीप कर के धनुष-कोडी गए, रामेश्वरम से थोड़ा दूर था...सड़क के अलावा समुद्र की बालू रेत में ही करीब ४५ मिनट जीप चली थी ......वहाँ सबसे ज्यादा मज़ा आया .....समुद्र तो इतना साफ़ था कि पानी के नीचे ऐसे नज़र आ रहा था मानो कांच में देख रहे हों। हम दोनों ने और लव भाईसाहब ने वहाँ समुद्र में बहुत मस्ती की......दूसरा कोई भी वहाँ नहीं नहा रहा था......पता नहीं क्यों.....वैसे ज्यादा लोग भी नहीं थे....आख़िर कर्नेल आंटी नानीसा के खूब मना करने पर हम पानी से बाहर आए ....नानीसा कह रहे थे कि जब दूसरा कोई भी यहाँ नहीं नहा रहा है तो हो सकता है यह जगह नहाने के लिए इतनी सुरक्षित नहीं हो....पर वहाँ समुद्र तो बहुत शांत था और गहरा भी नहीं था ..... खैर जो भी हो, हम तो तब तक खूब मस्ती कर चुके थे..... देखो ...


नानीमाँ तो शंख चुन रहे हैं....


लव-भाईसाहब के साथ मस्ती....







उसी दिन हम रामेश्वरम से निकल गए......वहीँ से हमने Qualis कर ली थी जो हमें वहां से मदुरै ले गई....रात वहाँ गुजारी....अगले दिन सुबह-सुबह (यानी २४/१२ को) मिनाक्षी मन्दिर में दर्शन कर के उसी गाड़ी में आगे hill-station kodaikanal चले गए......शाम से पहले- पहले, करीब ३.३० बजे kodaikanal पहुँचे गए।