मिट्टी मिल
गई तो मानो स्वर्ग मिल गया...कोई
खिलौना, कोई दूसरा
खेल, मिट्टी की बराबरी नहीं कर सकता ....उसके आगे टिक ही नहीं
सकता। इसलिए मिट्टी में खेलने का कोई भी मौका हम छोड़ते ही नहीं हैं। ऊपर से मम्मा-पापा को कहते हुए भी
सुन लिया, 'लागे
रज,बधे
गज' (कहावत राजस्थानी की है, भावार्थ कुछ ये
कि मिट्टी लगने से बच्चा अच्छा बढ़ता है....मिट्टी में खेलना बच्चे के शरीर के लिए अच्छा है.....)। और तो कुछ वाकई में कुछ अच्छा होता हो या
नहीं, मगर हाँ इस कहावत कि वजह से हमें मिट्टी में खेलने कि छूट ज़रूर मिल जाती
है। सिर्फ़ एक हिदायत के साथ की मैं मिटटी नहीं खाऊँगी (अब
मम्मा-पापा को कौन बताये की मिटटी तो मैं पहले बहुत खाती
थी, आजकल तो पेंसिल पर ज़ोर है...सुबह मेरे बॉक्स में नई पेंसिल डालते हैं और स्कूल
से वापस आने तक वो एकदम छोटी होती है। sharpner से
छील-छील कर
नहीं.....अब आप
ही समझ जाईये
ना। घर पर फिर
डांट पड़ती मगर अगले दिन फिर एक पेंसिल मिल जाती है...
स्कूल के लिए तो देनी ही पड़ेगी ना। )
बात है रविवार की... यानि ३०/११/२००८... सुबह-सुबह ही मम्मा-पापा के साथ हम जहाँ गए वहां बहुत सारे मकान बन रहे थे। अब जब मकान बन रहे थे तो वहां बहुत सारी 'मिट्टी' भी थी। स्वामी अंकल-आंटी और प्रभव वहां पहले से ही थे। अब मैं, अनिमेष और प्रभव ...और पास में ढेर सारी मिट्टी...परिणाम आप ख़ुद ही देख लो....
याद आगई मुंबई की....वहां मासोसा और बल्लू मासी हमें चौपाटी पर मिट्टी में पूरा दबा देते थे....सिर्फ़ चेहरा बाहर और बाकी पूरा शरीर मिट्टी के अन्दर..पापा ने भी हमें मिट्टी में दबा दिया....


अब मिट्टी में दबे हुए होने से क्या..हाथ तो ऊपर ही थे ना...बस फिर क्या था खूब मिट्टी उछाली...बालों में पूरी मिट्टी ही मिट्टी. वो तो मम्मा जब वापस आकर हमें नहलाने लगे तो हमें खूब daant पड़ी क्योंकि बालों से मिट्टी निकल ही नहीं रही थी..खासकर मेरे बालों से...मम्मा ने सख्त हिदायत दी की आईंदा अगर मिट्टी बालों में डाली तो मिट्टी में बिल्कुल नहीं खेलने दिया जायेगा. अब आगे की आगे देखेंगे, आज तो मज़े कर लिए ना...

वैसे अगले रविवार भी पापा हमको मिट्टी में खिलाने ले गए और इस बार किसी की ज़रूरत भी नहीं थी, हम दो ही काफी थे....देखो...
अब तो आज से वैसे भी हमारे खूब मज़े हैं....अरे बाबा, मेरी प्यारी नानिमा जो आ रही हैं जोधपुर से. और पता है साथ में कौन-कौन आ रहा है- जोधपुर से ही कर्नल-आंटी नानिसा और बॉम्बे से लव-भाईसाहब. कब से इंतज़ार कर थी मैं सबका. कल मेरे half-yearly exams ख़तम हो जायेंगे फिर हम सब घूमने जायेंगे...रामेश्वरम..कन्याकुमारी...और भी बहुत सारी ज़गह...वापस आ कर आपको सब बताउंगी. ठीक है?