Wednesday, October 29, 2008

दीपावली की शुभकामनायें


पता है, इस बार दिवाली पर सारा काम हमने ही किया। पूजा की पूरी तैयारी से ले कर दीये लगाना , भगवानके फूल सजाना, अगरबत्ती लगाना, भोग लगाना और भोग लगते ही जल्दी से ख़ुद मिठाई....हमारा मतलब, प्रसाद खाना ( कबसे बैठकर इंतज़ार कर रहे थे, आख़िर मम्मा ने कहा, चलो तुम पहले भगवान भोग लगा के खा लो....तब कहीं थोडी शान्ति मिली )।
पठाखे भी छोड़े।हमने फूलझारियाँ, अनार और ज़मीन- चकरियां छुडायीं।रॉकेट भी तो छोड़ना था पर मम्मा ने नहीं छोड़ने दिया। पापा भी तो नहीं थे... हैदराबाद से बाहर गए हुए थे। मम्मा तो मान ही नहीं रही, कह रही थी, 'अभी तुम छोटे हो ', अब कौन samjhaaye मम्मा को....फिर भी बहुत मज़ा आया। कितने सारे लोग थे...runjhun didi, सौरभ भइया, sajag भइया, pihu didi, ramya didi, prabhav, devesh, mithi, saptrishi और सभी aunti - uncle। हम सभी ने मिल के बहुत पठाखे छोड़े। रात इतनी हो गई थी।
आप सभी को भी दीपावली की शुभकामनायें!

Sunday, October 19, 2008

पाँव हिलाने से मम्मा बीमार होते हैं......


अभी कुछ दिन पहले जब विभु जीजी को डॉक्टर अंकल के पास दिखानेले गए तब हम सभी बाहर थोडी देर इंतज़ार कर रहे थे। वहां बाहर बैठे-बैठे मैं पाँव हिला रहा था। अचानक मम्मा ने मुझे पाँव हिलाते देखा और मुझे पाँव हिलाने से मना किया। मम्मा से पूछा, 'क्यों? पाँव क्यों नहीं हिलाना?' ....मम्मा बोले, ' पाँव हिलाने से मम्मा बीमार हो जाते हैं। ' ......यह जान कर मैंने पाँव हिलाना रोक कर दिया। थोडी देर तो चुप-चाप बैठा और सोचा परन्तु कहीं से भी पाँव हिलाने और मम्मा के बीमार होने का सम्बन्ध समझ में नहीं आया। आख़िर सोचा प्रत्यक्ष ही कर के देख लूँ। बस फिर क्या था, मैं पाँव हिलाने लगा और मम्मा के चेहरे की तरफ़ देखने लगा उसका असर ............. पर यह क्या , मम्मा तो पहले जैसे ही दिख रहे थे ..........कोई बिमारी का चिन्ह नहीं.........लगा मेरे पाँव हिलाने की गति में कुछ कमी है ........सो गति बढ़ा ली और लगा बहुत ज़ोर-ज़ोर से पाँव हिलाने .......परन्तु फिर भी आशानुरूप कुछ नज़र नहीं आया....इतने में मम्मा ने मुझे देखा...कुछ आश्चर्य से ...मानो उनको समझ नहीं आ रहा हो कि मैं यह फिर से क्या कर रहा हूँ....मुझसे भी और इंतज़ार नहीं हो पाया, लगातार इतने ज़ोर से पाँव हिलाना और वही गति कायम रखना मुश्किल हो रहा था ......आख़िर पूछ ही लिया , ' मम्मा...... आप बीमार हो रहे हो?' ......एक पल के लिए प्रश्नवाचक नज़रों से मम्मा ने मुझे देखा पर यह क्या.. अगले ही पल मम्मा के चेहरे पर बीमारी और दर्द नज़र आने लगा.....दिल के एक कोने में तो संतुष्टि हुई कि मुझे अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया मगर यकायक चिंतित भी हो उठा, पाँव हिलाना रोक कर कहने लगा, 'मम्मा आप बीमार मत होवो '। पाँव का हिलना रुकते ही मम्मा फिर से सामान्य होने लगे। और मेरे मन का संशय दूर हुआ।

Tuesday, October 7, 2008

पापा के ऑफिस में झूला

आज पापा के ऑफिस में दुर्गाष्टमी की पूजा थी.... पापा हमें भी अपने साथ ऑफिस ले गए .....आपको पता है हमने वहां पूजा के बाद क्या-क्या किया? वहां ऑफिस के चैंबर में जो white board था उस पर हमने चूहा बनाया, और वहां बैठे सब बड़े-बड़े scientist अंकल को हमने vowels सिखाये। और हाँ, हम आज ऑफिस में खूब झूला भी झूले। आपको भी दिखाएँ ?



Thursday, October 2, 2008

मैं स्कूल युनिफोर्म में

सबसे पहले तो , प्रिन्स मामा को हमारी तरफ़ से HAPPY BIRTHDAY! प्रिन्स मामोसा बताइए तो हमारे लिए आज क्या स्पेशल है आपकी तरफ़ से?दरअसल कल तो नक्शु भाईसाहब का बर्थडे था। मम्मा तो कल ही हमारी तरफ़ से लिखने वाले थे पर हमने सोचा अब तो हम बड़े हो गए हैं तो हमारा ब्लॉग हम ही लिखेंगे, इसलिए हम ही कंप्यूटर लेकर बैठ गए और बस ....... और नक्शु भाईसाहब, हम आपकी चोकलेट्स का इन्तजार कर रहे हैं......

सभी पूछते हैं 'अनिमेष स्कूल युनिफोर्म में कैसा लगता है?' (आप को नहीं मालूम मैं स्कूल जाता हूँ?) तो चलिए आज मैं आपको मेरे स्कूल के पहले दिन की कुछ तस्वीरे दिखता हूँ........


देखो, प्रिन्स मामोसा मुझे तैयार कर रहे हैं ......


स्मार्ट लग रहा हूँ ना?

देखो, हँसता-हँसता स्कूल जा रहा हूँ.....


आंटी (प्रभव की मम्मी) हमें bye कर रही हैं.........


कितना खुश हूँ........मैं भी जीजी के जैसे बड़ी स्कूल जाऊंगा...........

विभु: 'भैया हँसते हुए और खुश-खुश स्कूल जा रहा है ना......आप ख़ुद ही देखिये इस विडियो क्लिप में .......