
पता है, इस बार दिवाली पर सारा काम हमने ही किया। पूजा की पूरी तैयारी से ले कर दीये लगाना , भगवानके फूल सजाना, अगरबत्ती लगाना, भोग लगाना और भोग लगते ही जल्दी से ख़ुद मिठाई....हमारा मतलब, प्रसाद खाना ( कबसे बैठकर इंतज़ार कर रहे थे, आख़िर मम्मा ने कहा, चलो तुम पहले भगवान भोग लगा के खा लो....तब कहीं थोडी शान्ति मिली )।
पठाखे भी छोड़े।हमने फूलझारियाँ, अनार और ज़मीन- चकरियां छुडायीं।रॉकेट भी तो छोड़ना था पर मम्मा ने नहीं छोड़ने दिया। पापा भी तो नहीं थे... हैदराबाद से बाहर गए हुए थे। मम्मा तो मान ही नहीं रही, कह रही थी, 'अभी तुम छोटे हो ', अब कौन samjhaaye मम्मा को....फिर भी बहुत मज़ा आया। कितने सारे लोग थे...runjhun didi, सौरभ भइया, sajag भइया, pihu didi, ramya didi, prabhav, devesh, mithi, saptrishi और सभी aunti - uncle। हम सभी ने मिल के बहुत पठाखे छोड़े। रात इतनी हो गई थी।
आप सभी को भी दीपावली की शुभकामनायें!


4 comments:
दीपावली की शुभकामनायें..
आपको भी दीपावली की शुभकामनायें!
दीपावली की शुभकामनाऐं बेटा.. लगता है खुब मस्ती की है?
आपको भी दीपावली की शुभकामनाएं ।
घुघूती बासूती
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