Saturday, November 15, 2008

नन्ही परी और spider-man

आप सोच रहे होंगे कि इतने दिनों से हमने कुछ लिखा क्यों नहीं। दरअसल पिछले कुछ दिनों से हम दोनों को सर्दी, खांसी और बुखार हो रहा था। हम थोड़ा ठीक हुए तो मम्मा ने बताया कि chidren's day पर हम दोनों के स्कूल में 'fancy-dress' competition है। विभु जीजी बोली कि वो 'परी' बनेगी.......'परियों की शहजादी'...... मैंने कहा ,"अगर जीजी 'परी' बनेगी तो मैं 'परा' बनूंगा। (जीजी अक्सर कहती है की वो परी है....अब अगर जीजी परी है तो मैं भी तो 'परा' हुआ ना ......(जब भी माँ याँ मम्मा जीजी के लिए गाना गातें हैं, 'मेरे घर आई एक नन्ही परी......', मैं कहता हूँ -मेरे लिए भी गाओ 'मेरे घर आया एक नन्हा परा....')। हाँ तो मैं कह रहा था मुझे भी परा बनना है.... कुछ ऐसे........


पर मम्मा ने कहा तुझे 'परा' किसी और दिन बनाएँगे। मैंने फोटो में देखा था कि जीजी जब मेरे जितनी थी तब बिल्ली बनी थी (scan करने के बाद आपको भी वो फोटो दिखाऊंगा ), इसलिए मैंने निश्चित किया कि मैं बिल्ला बनूँगा। कल (यानि children's day पर ) सुबह-सुबह मम्मा ने पहले जीजी के face पर painting की और जीजी को तैयार किया फिर मुझे बुलाया बिल्ला बनाने के लिए। पता नहीं क्यों मुझे कुछ जच नहीं रहा था। बोला-मैं बिल्ला नहीं बनूँगा, मैं spider-man बनूँगा। स्कूल के लिए वैसे ही देरी हो रही। फिर भी मम्मा ने मुझे फटाफट spider-man बनाया। देखो हम दोनों कुछ ऐसे लग रहे थे......
फिर मम्मा-पापा हमारे साथ स्कूल आए ( मम्मा ने अपने ऑफिस में कह दिया था की वो देर से आयेंगे और पापा के तो ऑफिस में उस दिन बहुत ज़रूरी काम था फिर भी वो हमारे साथ स्कूल चले)। मेरी स्कूल में तो competition शुरू होने में कुछ देर थी इसलिए मैं भी जीजी के स्कूल गया। जीजी तो माइक पर बहुत अच्छे से बोली। मम्मा कह रही थी की मैं थोड़ा धीरे बोला, शायद शरमाते हुए...(क्या करूँ, पहली बार जो था...अरे बोला तो था ना )। आज जब जीजी स्कूल गई तो उनकी teacher ने बताया की जीजी को prize मिला है। मेरे तो आज छुट्टी थी, इसलिए मेरा तो मुझे पता नहीं। आपको हमारे कल के कुछ और फोटोज दिखाऊ......







(गोलू मामा आप मम्मा को फ़ोन पर कह रहे थे ना, 'तू फोटो डालने में इतनी कंजूसी क्यों करती है', इसलिए आज ज्यादा फोटो पोस्ट किए हैं)

Sunday, November 2, 2008

मैं हूँ ना......

मम्मा मिशु को [अनिमेष का मैंने प्यार से छोटा नाम 'मिशु' रक्खा है, मैं जब भी छोटे भैय्या को मिशु कह कर बुलाती हूँ तो अगर वह खुश होता है उसका मूड अच्छा होता है तो 'मिशु' सुन कर जवाब भी देता है और आता भी है और अगर उसका मूड कुछ ठीक नहीं है तो कह देता है (कभी गुस्से में, तो कभी चिल्लाकर और कभी ऐसे ही ..) ' मैं मिशु नहीं हूँ, मैं अनिमेष हूँ ', देखो है ना कितना मूडी...] ........मैं क्या कह रही थी? हाँ, मम्मा ने मिशु को किसी बात पर ज़ोर से डाँटा। मम्मा की डांट से वह रुआंसा हो गया और रोते-रोते गुस्से में मम्मा से कहने लगा, 'मैं स्कूल जाऊँगा तो अब वापस आउंगा भी नहीं, वहीँ रह जाऊँगा , रात में भी वहीँ रहूँगा '। मम्मा ने जब उसका चेहरा देखा तो एकदम प्यार से बोला, ' नहीं बेटा...ऐसा नहीं करना भई। फिर मैं प्यारा बेटा किसको बोलूंगी ? मैं राजा बेटा किसको बोलूंगी ?' मैं सुन रही थी, झट से बोली, 'मैं हूँ ना ! '


देखो, हूँ ना मैं राजा बेटा....प्यारा बेटा.....