Sunday, November 2, 2008

मैं हूँ ना......

मम्मा मिशु को [अनिमेष का मैंने प्यार से छोटा नाम 'मिशु' रक्खा है, मैं जब भी छोटे भैय्या को मिशु कह कर बुलाती हूँ तो अगर वह खुश होता है उसका मूड अच्छा होता है तो 'मिशु' सुन कर जवाब भी देता है और आता भी है और अगर उसका मूड कुछ ठीक नहीं है तो कह देता है (कभी गुस्से में, तो कभी चिल्लाकर और कभी ऐसे ही ..) ' मैं मिशु नहीं हूँ, मैं अनिमेष हूँ ', देखो है ना कितना मूडी...] ........मैं क्या कह रही थी? हाँ, मम्मा ने मिशु को किसी बात पर ज़ोर से डाँटा। मम्मा की डांट से वह रुआंसा हो गया और रोते-रोते गुस्से में मम्मा से कहने लगा, 'मैं स्कूल जाऊँगा तो अब वापस आउंगा भी नहीं, वहीँ रह जाऊँगा , रात में भी वहीँ रहूँगा '। मम्मा ने जब उसका चेहरा देखा तो एकदम प्यार से बोला, ' नहीं बेटा...ऐसा नहीं करना भई। फिर मैं प्यारा बेटा किसको बोलूंगी ? मैं राजा बेटा किसको बोलूंगी ?' मैं सुन रही थी, झट से बोली, 'मैं हूँ ना ! '


देखो, हूँ ना मैं राजा बेटा....प्यारा बेटा.....

3 comments:

रंजन said...

विभु बेटा, भैया को जल्दी से मना ले.. बहुत प्या्रा है... तुम दोनों पापा मम्मी के दुलारे हो..

Udan Tashtari said...

दोनों ही राजा बेटे हैं..छोटा है न, मना लो!!

seema gupta said...

" no jaghda ok, acche becchy.."

shake hand..