Monday, May 18, 2009

चेन्नई से कन्याकुमारी

अभी तो यात्रा कि शुरुआत थी....
चेन्नई से उसी दिन (यानि २१/१२) शाम को हम ट्रेन में कन्याकुमारी के लिए रवानाहो गए। अगले दिन सुबह-सुबह कन्याकुमारी। वहां होटल में पहले से ही बुकिंग थी। तैयार हो कर पूरे दिन कन्याकुमारी घुमे।मम्मा बता रही थी वहां तीन समुद्र एक ही जगह मिलते हैं पर मुझे तो एक ही समुद्र दिख रहा था । आप भी देखो....


मेरी चुटकी की आवाज़ तेज़ आती है या जीजी की सिटी की ....
जीजी ने तो फूल ले लिए, मैं क्या लूँ?
मैंने कन्याकुमारी में सूरज(सूर्य) को समुद्र में डूबते देखा....मम्मा कह रही थी कि सुबह-सुबह सूरज फिर उग जाता है। पर मैंने तो कभी भी सूरज को उगते हुए नहीं देखा। मुझे उगते हुए सूरज को देखना है। मम्मा ने कहा उसके लिए सुबह जल्दी उठना पड़ता है। मैंने कहा भी मुझे ५ बजे उठा देना पर देखो मुझे अभी तक उगता हुआ सूरज नहीं दिखाया।

(एक बात तो आपको बताना भूल ही गई...परसों यानि २० मई को मिशु का जन्मदिन है। वोह ४ साल का हो जाएगा। हम लोग चूँकि अभी जोधपुर हैं इसलिए मम्मा-पापा ने मिशु के लिए गिफ्ट courier से भेजा है....क्या भेजा यह तो पता नहीं...अभी हमारे पास पहुँचा नहीं है..देखते हैं....और हमारे गोलू मामा..वोह तो कोई जन्मदिन का इंतज़ार भी नहीं करते कुछ दिलाने के लिए...जो बोलो वो ही तैयार....मैंने टी.वी . में एक barbie doll देखि थी जिसकी चोटियाँ काट कर अलग-अलग अपने पसंद से चोटियाँ लगा सकते हैं। मम्मा से कहा कि मुझे दिलाओ तो कहने लगे कि 'तू संभाल कर नहीं रखती है, दो दिन खेल कर सब खो देगी..अपनी पुरानी चीजे संभाल के रखो फिर लायेंगे'। पर मम्मा को बताना मत, यहाँ गोलू मामा ने मुझे वो barbie-doll दिला दी है। आपको भी उसका फोटो दिखाऊंगी, पर बाद में..)


2 comments:

रंजन said...

बहुत प्यारी फोटो है.. मजा आ गया दोस्त... मैं भी जा रहा हूँ क्न्याकुमारी एक दो दिन बात.. देख ता हूँ कितने समुद्र है

और जन्म दिन की शुभकामनाऐं...

प्यार..

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

umdaa!