Friday, October 23, 2009

क्या मुझे भी घर छोड़ कर जाना पड़ेगा...?


अभी कुछ ही दिन पहले मम्मा जब मुझे पढ़ा रहे थे तो हमेशा की तरह मन पढ़ाई में कम और दूसरी बातों की ओर ज्यादा था। मन कुछ उदास हो गया । मम्मा से पूछा , 'मम्मा, जब मैं बड़ी हो जाऊँगी तो क्या मुझे भी यह घर छोड़ कर जाना पड़ेगा। ' मम्मा ने पूछा , 'क्यों बेटा ? ' ...' मम्मा, नानीमाँ तो जोधपुर ही है और आप हमें लेकर इस घर में आ गए। और मम्मा, नानीमाँ के मम्मी-पापा कहाँ रहते हैं ? नानीमाँ उनके पास से इतनी दूर जोधपुर कैसे आए? बताओ ना मम्मा........ और बताओ ना क्या मुझे भी इस घर से जाना पड़ेगा? '..... मम्मा ने पूछा , ' तुझे जाना है बेटा?' मम्मा का ये पूछना था और बस....इतनी देर से जिन्हें अपनी आंखों में रोके हुए थी वो आंसू की बूंदे बाहर छलक आई ......मम्मा से बोली ..'नहीं मम्मा, मैं आपको छोड़ कर कहीं भी नहीं जाऊँगी ......आप मुझे बहुत प्यारे लगते हो ....आपके पास ही रहूंगी.... ।' मम्मा ने प्यार से मेरे सर पर हाथ फेरा ... थोड़ी ही देर में मम्मा से फिर कहा....'मम्मा, अगर कभी कहीं गई या कभी कहीं जाना पड़ा ना तो आपको अपने साथ ले कर चलूंगी ....'


मम्मा ने मुझे अपने सीने से लगा रखा था पर फिर भी न जाने क्यों मन बहुत भारी था.....



Sunday, October 18, 2009

थोड़ी लड़ाई.... थोड़ा प्यार ......



आप सभी को दिवाली की शुभकामनाएँ। हमने तो दिवाली पर खूब मज़े किए, खूब पटाखे छोड़े ........ पूजा के बाद जब मम्मा फोटो खीचनें लगे तो थोडी लड़ाई भी की .....लड़ाई इस बात की कि पहले फोटो किसका खिंचा जाए ....अकेले-अकेले का ....या ...साथ -साथ में .... मुझे पहले अकेले की फोटो खिंचानी थी पर जीजी मान ही नहीं रही थी ...जिद कर रही थी कि पहले हमारी साथ में खींचो .....अब यह भला क्या बात हुई ....जीजी की भी तो एक अकेले फोटो खींची थी पूजा के दीयों के साथ .....जीजी कहने लगी अकेले खींचनी है तो भैया की भी ( यानि मेरी ) दीयों के साथ खींचो, दूसरी जगह फोटो लेओगे तो मैं भी साथ खड़ी रहूंगी......अब, मेरी मर्जी होगी वहीँ तो मैं अपनी फोटो खिंचवाऊंगा ना ......तो बस हो गई लड़ाई शुरू .....


जीजी तो खूब रोई भी, बड़ी मुश्किल से मम्मा के बहुत समझाने पर हम माने ......अब जब मान ही गए थे तो बड़े प्यार से हाथ पकड़ कर फोटो खिंचाया .......


जीजी ने अकेले खड़े रह कर फोटो खिंचवाई तो मैं क्यों पीछे रहूँ .......


मैं बैठ कर .....तो जीजी भी बैठ कर ... बस ऐसे ही चलता रहा...







Saturday, October 10, 2009

मेरे retirement plans



कुछ दिनों पहले मम्मा शाम को एक पार्टी में जा रहे थे। चूंकि मुझे सुबह थोड़ा बुखार था इसलिए मेरे जिद करने पर भी मुझे साथ ले जाने के लिए तैयार नहीं हुए। मम्मा से पूछा, 'ये तो बताओ पार्टी किस बात की है?' मम्मा बोले कि उनके ऑफिस में एक अंकल retire हो रहे हैं इसलिए वो retirement की पार्टी दे रहे रहे हैं। आज तक बर्थडे पार्टी सुना था , शादी की पार्टी सुना था (इन में जाती भी हूँ ) पर यह भला retirement पार्टी क्या होती है ....... यह retirement क्या होता है। मम्मा से पूछा तो बोले , ' जब हम ६० साल के हो जाते हैं तो ऑफिस से retirement हो जाता है यानी फिर ऑफिस नहीं जाना पड़ता। ' बड़ा आश्चर्य हुआ ये सुन कर....फिर से पूछा .......क्या ६० साल के होने बाद ऑफिस बिल्कुल नहीं जाना पड़ता ?.....स्कूल भी नहीं और कॉलेज भी नहीं और ऑफिस भी नहीं ? ........ मम्मा ने कहा - ' हाँ बेटा। ' .........इतना सुकून मिला यह सुनकर ......तुरंत मम्मा को कहा , ' मम्मा , जब मैं 60 साल की हो जाउंगी ना तब खू ssssss ब T.V. देखूँगी और खू ssssss ब सोऊँगी ........ । ' मम्मा बोले , 'अच्छा बेटा। '



लगा कि एक और बात अभी से साफ़ कर देना ही बेहतर है....मम्मा से कहा, ' देखो, उस समय मुझे यह मत कहना कि यह काम करदे.... वो काम कर दे .....मैं कोई काम भी नहीं करुँगी....सिर्फ़ T.V. देखूंगी और सोऊँगी ....जितनी देर मेरी इच्छा होगी उतनी देर..... । ' मम्मा हँस दिए (पता नहीं क्यों? ) और बोले, ' अच्छा बाबा, तुझे कोई काम भी नहीं बोलूंगी । ' ...... चैन की एक लम्बी साँस ली ........
यह सब सोच ही रही थी कि अचानक एक ख्याल आया ....... और मम्मा को पूछा , 'मम्मा, आप 60 साल के कब हो होंगे ? '